संवत्सर (वर्ष)
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संदर्भ - भारतीय ज्योतिषशास्त्राचा इतिहास (कै. शं. बा. दीक्षित)
साठ संवत्सरांचे एक चक्र असते.
साठ वर्ष पूर्ण होताना इंग्रजी दिवस, इंग्रजी महिना, भारतीय तिथी, संवत्सर, नक्षत्र, वासर (वार) एकाच दिवशी येते.
उत्तरेस बार्हस्पत्य (बृहस्पतीने केलेले) संवत्सर चालते
दक्षिणेस चांद्रसौर संवत्सर चालते. ते १३ संवत्सरांनी उत्तरेच्या मागे आहे.
सौरसंवत्सर - सूर्य अश्विनी नक्षत्राच्या आरंभापासून निघून आपल्या गतीने नक्षत्रचक्रात भ्रमण करीत पुन्हा त्याच ठिकाणी येण्यास जो काल लागतो त्याला सौरवर्ष म्हणतात. हा काळ ३६५ दिवसांचा असतो.
चांद्रवर्ष ३५४ दिवसांचे असते.
दोन प्रकारच्या संवत्सरात दरवर्षी ११ दिवसांचा फरक पडतो.
ती तूट भरून काढण्याकरीता दर तीन वर्षांनी अधिकमास/मलमास/धोंडामहिना/पुरुषोत्तममास अधिक धरतात.
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संवत्सरांची नावे
ही नावे काही विशिष्ट घटनांची त्या त्या वर्षातील नोंद घेऊन केली असावीत. (भृगू संहिता - जातक खंड)
हा काल दोन ते अडीच हजार वर्षांचा असावा.
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१) प्रभव (१९२७-२८, १९८७-८८)
२) विभव (१९२८-२९, १९८८-८९)
३) प्रमोद (१९२९-३०, १९८९-९०)
४) शुक्ल (१९३०-३१, १९९०-९१)
५) प्रजाधीश ( १९३१-३२, १९९१-९२)
६) अंगिरा (१९३२-३३, १९९२-९३)
७) श्रीमुख (१९३३-३४, १९९३-९४)
८) भाव (१९३४-३५, १९९४-९५)
९) युवा (१९३५-३६, १९९५-९६)
१०) धातृ (१९३६-३७, १९९६-९७)
११) ईश्वर (१९३७-३८, १९९७-९८)
१२) बहुधान्य (१९३८-३९, १९९८-९९)
१३) प्रमाथी (१९३९-४०, १९९९-२०००)
१४) विक्रम (१९४०-४१, २०००-२००१)
१५) वृष (१९४१-४२, २००१-२००२)
१६) चित्रभानु (१९४२-४३, २००२-२००३)
१७) सुभानु (१९४३-४४, २००३-२००४)
१८) तारण (१९४४-४५, २००४-२००५)
१९) पार्थिव (१९४५-४६, २००५-२००६)
२०) व्यय (१९४६-४७, २००६-२००७)
२१) शरत् (सर्वजित) (१९४७-४८, २००७-२००८)
२२) सर्वधारी ((१९४८-४९, २००८-२००९)
२३) विरोधी (१९४९-५०, २००९-२०१०)
२४) विकृत (१९५०-५१, २०१०-२०११)
२५) खर (१९५१-५२, २०११-२०१२) सध्या चालू आहे
२६) नंदन (१९५२-५३, २०१२-२०१३)
२७) विजय (१९५३-५४, २०१३-२०१४)
२८) जय (१९५४-५५, २०१४-२०१५)
२९) मन्मथ (१९५५-५६, २०१५-२०१६)
३०) दुर्मुख (१९५६-५७, २०१६-२०१७)
३१) विलंब (१९५७-५८, २०१७-२०१८)
३२) हेमलंब (१९५८-५९, २०१८-२०१९)
३३) विकारी (१९५९-६०, २०१९-२०२०)
३४) शार्वरी (१९६०-६१, २०२०-२०२१)
३५) प्लव (१९६१-६२, २०२१-२०२२)
३६) शुभकृत् (१९६२-६३, २०२२-२०२३)
३७) शोभन (१९६३-६४, २०२३-२०२४)
३८) क्रोधी (१९६४-६५, २०२४-२०२५)
३९) विश्वावसु (१९६५-६६, २०२५-२०२६)
४०) पराभव (१९६६-६७, २०२६-२०२७)
४१) प्लवंग (१९६७-६८, २०२७-२०२८)
४२) कीलक (१९६८-६९, २०२८-२०२९)
४३) सौम्य (१९६९-७०, २०२९-२०३०)
४४) साधारण (१९७०-७१, २०३०-२०३१)
४५) विरोधकृत् (१९७१-७२, २०३१-२०३२)
४६) परिधावी (१९७२-७३, २०३२-२०३३)
४७) प्रमादी (१९७३-७४, २०३३-२०३४)
४८) आनंद (१९७४-७५, २०३४-२०३५)
४९) राक्षस (१९७५-७६, २०३५-२०३६)
५०) नल (१९७६-७७, २०३६-२०३७)
५१) पिंगल (१९७७-७८, २०३७-२०३८)
५२) काल (युक्त) (१९७८-७९, २०३८-२०३९)
५३) सिध्दार्थ (१९७९-८०, २०३९-२०४०)
५४) रौद्र (१९८०-८१, २०४०-२०४१)
५५) दुर्मति (१९८१-८२, २०४१-२०४२)
५६) दुंदुभी (१९८२-८३, २०४२-२०४३)
५७) रुधिरोद्गारी (१९८३-८४, २०४३-२०४४)
५८) रक्ताक्षि (१९८४-८५, २०४४-२०४५)
५९) क्रोधन (१९८५-८६, २०४५-२०४६)
६०) क्षय (१९८६-८७, २०४६-२०४७)
॥श्रीराम समर्थ॥